मंगलवार, 26 नवंबर 2013

तेरा आंचल मेरा सारा ज़हां ....













मैने तुम्‍हें जब भी कहा माँ यकी मानों,
सज़दे में सर मेरा हरदम हो जाता है ।

दौर कैसा भी मुश्किल आया हो वहां,
तेरी हर दुआ का असर हो जाता है ।

तुझे धरती कहूं या अम्‍बर बता मुझे,
तेरा आंचल मेरा सारा ज़हां हो जाता है ।

फिक्र के साये में कटे हर पल तेरा जो,
मेरा हर पल बेफि़क्र हो गुजर जाता है ।

साथ तेरा हो तो खुशियों को खबर होती,
बिन तेरे उदास लम्‍हा सदा चला आता है ।

6 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर रचना लिख दी है आपने.....

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  2. तुझे धरती कहूं या अम्‍बर बता मुझे,
    तेरा आंचल मेरा सारा ज़हां हो जाता है ।

    Bahut Bahut Sunder....

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  3. माँ का साया बादल से भी बड़ा होता है ... सदा साथ रहता है ...
    लाजवाब ..

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  4. दौर कैसा भी मुश्किल आया हो वहां,
    तेरी हर दुआ का असर हो जाता है ।
    ...लाज़वाब...माँ कब दूर हो पाती है...

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