सोमवार, 22 अगस्त 2016

शब्‍दों के श्रद्धासुमन !!!!!!



पापा आपकी यादों से
आज फ़िर मैंने
अपनी पीठ टिकाई है
पलकों पे नमी है ना
मन भावुक हो रहा है
हर बरस की तरह 
आज फ़िर ...
ये तिथि जब भी आती है
बिना कुछ कहे
मन चिंहुक कर
बाते करने लगता है आपकी 
कुछ उदासियां 
ठहरी हैं मन के पास ही
कुछ ख़्याल बैठे हैं
गुमसुम से !
...
कितना कुछ बदला
पर ये मन आज भी
आपके काँधे पे
सिर टिकाये हुये हैै
आप यूँ ही रहेंगे
साथ मेरे जानती हूँ
आपका चेहरा बार-बार
सामने आ रहा है
नहीं संभाल पाती जब
तो उठाकर क़लम
शब्‍दों के श्रद्धासुमन
अर्पित कर देती हूूॅं
जहाँ भी हो आप
अपना आशीष देते रहना !!!

5 टिप्‍पणियां:

  1. interesting . we should not abuse girl child . rather girl child is equal to boy child. MOUTH WATERING RECIPES OF INDIA

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  2. we should not abuse girl child

    in todays world girls are on higher success level as compared to boysAd Posting Job

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  3. उत्तर
    1. जी मेरी एक पुस्तक अर्पिता के नाम से प्रकाशित हो चुकी है ....
      आभार आपका 🙏

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