शुक्रवार, 25 फ़रवरी 2011

तुम बहुत अच्‍छी हो ....








कभी मां गौरेया कहती,

कभी कहती नन्‍हीं चिडिया

कभी कहती शैतान

मां के यह प्‍यारे

सम्‍बोधन सुनकर

मैं रह जाती हैरान

मेरी पलकों के सपने

जाने कब

वह अपनी आंखों में ले लेती

और मुझे सिर्फ

हौसला देती आगे बढने का

अपने पंखों में मुझको छुपा कर

मुझे हर तूफान से बचाती

और मेरे लिये तो

बस सारी दुनिया वही हो जाती

मेरे हर सवाल का जवाब

उसके पास होता था

सिवाय इस के

जब मैं भावुक होकर कहती

तुम बहुत अच्‍छी हो

तो एक मुस्‍कान के साथ कहती

बेटा हर मां

अपने बच्‍चे के लिये

अच्‍छी होती है

और हर बच्‍चा

अपनी मां का प्‍यारा होता है ...

बुरे तो बस हालात हो जाते हैं

जिनके आगे

हम लाचार हो जाते हैं ...।

12 टिप्‍पणियां:

  1. हौसला देती आगे बढने का
    अपने पंखों में मुझको छुपा कर
    मुझे हर तूफान से बचाती
    और मेरे लिये तो
    बस सारी दुनिया वही हो जाती
    बहुत सुंदर .....माँ से अच्छा कौन होता है.....

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  2. बहुत सुन्दर रचना!
    आपकी इस खूबसूरत पोस्ट की चर्चा तो बाल चर्चा मंच पर भी की गई है!
    http://mayankkhatima.blogspot.com/2011/02/34.html

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  3. माँ से अच्छा कौन होता है|बहुत सुन्दर रचना|

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  4. चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर आपकी प्रस्तुति मंगलवार 01-03 - 2011
    को ली गयी है ..नीचे दिए लिंक पर कृपया अपनी प्रतिक्रिया दे कर अपने सुझावों से अवगत कराएँ ...शुक्रिया ..

    http://charchamanch.uchcharan.com/

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  5. बहुत सुन्दर कविता प्रस्तुत की है आपने ...

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  6. मां से प्यारा और कौन सा रिशता है.... कोई नहीं जानता..
    सुन्दर भाव समेटे रचना.

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  7. और हर बच्‍चा
    अपनी मां का प्‍यारा होता है ...
    बुरे तो बस हालात हो जाते हैं
    जिनके आगे
    हम लाचार हो जाते हैं ...।

    बहुत संवेदनशील सुन्दर कविता लिखी है आपने ...

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  8. बेटा हर मां

    अपने बच्‍चे के लिये

    अच्‍छी होती है

    और हर बच्‍चा

    अपनी मां का प्‍यारा होता है ...

    बुरे तो बस हालात हो जाते हैं

    जिनके आगे

    हम लाचार हो जाते हैं ...

    बहुत भावपूर्ण और सार्थक रचना..बहुत सुन्दर

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