मंगलवार, 1 मई 2012

बेटी को पराई ...












आपने देखा होगा,
आपने जाना होगा,
दिल ने इजाजत दी हो,
या नहीं,
पर आपने माना होगा ।
रिवाज के नाम पर,
रस्‍मों की दुहाई देते लोग ।
लहू के नाम पर,
रिश्‍तों  की दुहाई देते लोग ।

जन्‍म देने वाली,
होती एक मां
फिर भी बेटे को,
कुल का दीपक,
बेटी को पराई ही,
सदा कहते लोग.... 


थाम के उंगली चलना छोड़ दे ... 

उसे लिखना तो नहीं आता
पर वो अश्‍कों की नमी के बीच
हिचकियों के साये में
अटक - अटक कर बोल रही थी
इन शब्‍दों को
मन द्रवित हो गया ...
माँ
मुझे तुम
खेलने को खिलौना मत दो
पर मेरे मन को
यह मत कहो कि
वह खिलौना देखकर
मचलना छोड़ दे  ...
मेरे मन का बच्‍चा अभी भी
तुम्‍हारे साये में चलता है
उससे ये मत कहो
कि वो तुम्‍हारी
थाम के उंगली चलना छोड़ दे ...!!!

19 टिप्‍पणियां:

  1. मर्मस्पर्शी,सच्चाई है यही...

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  2. रिवाज के नाम पर,
    रस्‍मों की दुहाई,
    और ...
    लहू के नाम पर,
    रिश्‍तों की दुहाई देते लोग ...
    उससे ये मत कहो
    कि वो तुम्‍हारी
    थाम के उंगली चलना छोड़ दे .... !!
    बहुत बार उस उंगली की जरुरत पड़ेगी .... !!

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  3. संवेदनशील रचना अभिवयक्ति.....

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  4. द्रवित कर गयी आपकी रचना !

    माँ
    मुझे तुम
    खेलने को खिलौना मत दो
    पर मेरे मन को
    यह मत कहो कि
    वह खिलौना देखकर
    मचलना छोड़ दे ...
    मेरे मन का बच्‍चा अभी भी
    तुम्‍हारे साये में चलता है
    उससे ये मत कहो
    कि वो तुम्‍हारी
    थाम के उंगली चलना छोड़ दे .

    आँखों में नमी उतर आई इन पंक्तियों को पढ़ कर ! बहुत सुन्दर लिखा है आपने ! अंतर को गहराई तक भिगो गया !

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  5. जन्‍म देने वाली,
    होती एक मां
    फिर भी बेटे को,
    कुल का दीपक,
    बेटी को पराई ही,
    सदा कहते लोग....

    Bahut Sunder, sateek panktiyan

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  6. dil ko chhu gai aapki ye behtreen post ---
    vastav kabhi -kabhi lagta hai ki jisko apne khoon se paal -po
    sh kar bada kiya vo parai amanat hoti .
    ye kiasa vidhaan hai .
    par srishhti ka yahi to niyam hai na---
    bahuthi marm-saparshi rachna
    poonam

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  7. अंतर तक स्पर्श करती सत्य परक अभिव्यक्ति

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  8. भाव जगत को उद्वेलित करती है यह पोस्ट .नै पुरानी हलचल पर लिंक कम लिए आपका शुक्रिया .

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  9. Ek beti ke man ke bachhe ka kalrav bakhoobi chitrit kiyaa hai
    aapne Sada Ji .....
    मेरे मन का बच्‍चा अभी भी
    तुम्‍हारे साये में चलता है
    उससे ये मत कहो
    कि वो तुम्‍हारी
    थाम के उंगली चलना छोड़ दे ...!!! Wah, Wah ....

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  10. अंतस में उतरते भाव … बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति

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