मंगलवार, 20 अक्तूबर 2009

मां का दुपट्टा ....


वो अपने

छोटे-छोटे हांथों से

मां का दुपट्टा

सर पे डाल कर

कभी दुल्‍हन बन

बन जाती

झांक कर कभी शर्माती

उसके इस खेल में

शामिल होता हर कोई

चेहरे पर मुस्‍कान

सजाये वह दौड़ कर

गोद में छुप जाती ....

वो अपने ....।





लाडली इस इन्‍तजार में है कि आप भी उसके लिये

दो शब्‍द लिखेंगे, अगर लिख चुके हैं

तो भेजने में देर क्‍यों ?

6 टिप्‍पणियां:

  1. aley! aley! kitni pyali hai laadli...... chhona chhona....chhweet.... chhweet......... punnu......punnu...... tunnu .........tunnu.....

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  2. बचपन के सलोने रंग ! कितने मनोहारी !
    आभार ।

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  3. बचपन का एक सुंदर चित्र..अच्छी कविता..बढ़िया लगी आपकी यह भावनाएँ..बहुत बहुत धन्यवाद

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