शुक्रवार, 15 अप्रैल 2011

मां जब भी ...













मां जब भी सज़दे में होती है,
उसकी आंखे नम हो जाती है

कहती है मेरे अश्को को जाने दे,
तेरी बलाएं तो कम हो जाती हैं

8 टिप्‍पणियां:

  1. इस दुनियाँ में माँ का कोई विकल्प नहीं !
    ममता से भरी भाव पूर्ण पंक्तियाँ !

    उत्तर देंहटाएं
  2. वाह ..बहुत सुन्दर ..हर माँ यही सोचती है

    उत्तर देंहटाएं
  3. आपकी उम्दा प्रस्तुति कल शनिवार (16.04.2011) को "चर्चा मंच" पर प्रस्तुत की गयी है।आप आये और आकर अपने विचारों से हमे अवगत कराये......"ॐ साई राम" at http://charchamanch.blogspot.com/
    चर्चाकार:Er. सत्यम शिवम (शनिवासरीय चर्चा)

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत बहुत बहुत सुन्दर
    एक और सुन्दर कविता आपकी कलम से !

    उत्तर देंहटाएं
  5. बेहद सुन्दर रचना.........
    शुभकामनाओं सहित....
    बधाई.....

    उत्तर देंहटाएं