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शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2009

अक्षर हैं मुझको गढ़ने ...


जाने दो मां

मुझको भी पढ़ने,

जाने कितने

अक्षर हैं मुझको गढ़ने,

पढ़ना लिखना

बहुत जरूरी है

नहीं तो

करना पड़ता

सिर्फ मजूरी है

तुम भी पढ़ पाती

तो पूरी मजूरी

मिलती तुम्‍हे

मैं घर का सारा

काम करूंगी

पढ़कर भी

तुम्‍हारा ही

नाम करूंगी

वक्‍त अपना बिल्‍कुल

न बर्बाद करूंगी

मां मुझको भी दिला दो

एक किताब

जिसमें लिखा हो

सारा हिसाब

क्‍या खोया क्‍या पाया

या

सारा जीवन यूं ही गंवाया !