गुरुवार, 9 जून 2011

मां को कैसे ....








मां ईश्‍वर का दूसरा रूप !

तुमने सोचा है कभी

जिनके पास मां नहीं होती

उनके बारे में ....

वो मां को कैसे

महसूस करते हैं ...?

बन्‍द करके आंखों को

छवि तलाशते हैं मां की

आंसू भरी पलकों के बीच

मां उसी ओज से

मुस्‍कराती नजर आती है

मां की उंगलियों का स्‍पर्श

सिर पे एक छुअन मां की

माथे पे मां का प्‍यार

पीठ सहलाती हथेली मां की

इन सबके साथ

झिलमिलाती आंखों से

निहारना मां को

एक दर्द प्‍यार भरा

वो मां की दुआएं वो बोली प्‍यारी

बहुत याद आता है हरपल

मां का न होना पास में

आशीषों का खजाना मेरे नाम वाला

जब खो जाता है तो

रूला जाता है हर पल ...बिन मां के ...


11 टिप्‍पणियां:

  1. सचमुच माँ की दुवाओं से बड़ी दुनिया में कोई भी चीज नहीं !

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  2. मां को समर्पित श्रेष्ठ रचना।
    मां को नमन।

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  3. मां का न होना पास में

    आशीषों का खजाना मेरे नाम वाला

    जब खो जाता है तो

    रूला जाता है हर पल ...बिन मां के ...
    ..........ममता से भरी भाव पूर्ण पंक्तियाँ !

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  4. रुद्राक्ष के एक एक मनकों में जिस तरह ईश्वर का जाप होता है, उसी तरह इस ब्लॉग के माध्यम से तुमने 'माँ' का जाप किया है , माँ हमेशा साथ रहेगी

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  5. इन सबके साथ

    झिलमिलाती आंखों से

    निहारना मां को

    एक दर्द प्‍यार भरा
    maa to hoti hi aisi hai .bahut bhav bhari abhivyakti .aabhar

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  6. सुंदर .... माँ तो बस माँ है..... उसके बिना क्या है....

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  7. माँ को समर्पित अच्छी रचना ...माँ का महत्त्व वही समझते हैं जिनको माँ नहीं मिलती

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  8. तुम्हारे जैसी ही प्यारी है तुम्हारी प्रस्तुति .

    .बहुत सुंदर . मेरी शुभकामनाएँ चूहेमल का देखो खेल

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  9. तुम्हारे जैसी ही प्यारी है तुम्हारी प्रस्तुति .

    .बहुत सुंदर . मेरी शुभकामनाएँ चूहेमल का देखो खेल

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  10. sada ji
    bahut hi bhauk kar gai maa par likhi aapki rachna sach me maa ke bina jivan adhura sa hi lagta hai .
    maa---ki yaad dila di aapki post ne ,man bahut hi bhar aaya bhar aaya---- bahut bahut badhai
    poonam

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