बुधवार, 2 सितंबर 2009

गिर जाती कभी . . . .


बाहों के झूले में चुप हो जाती

सपनों की दुनिया में खो जाती

कभी मुस्‍काती सोते-सोते जब,

मां तो बस तुझमें खो जाती ।

खिलौने हांथ में लेकर वह मुझे,

नन्‍हें कदमों से कभी देने आती ।

पैर धरती पर रखती तो लगता,

उड़ रही हो देख मुझे भाग आती ।

गिर जाती कभी घुटनों के बल वह,

आकर मुस्‍कान से छुपाने लग जाती ।

नयनों से उसके ओझल होती मैं जब,

वह ढूंढती चारों ओर मां कहती जाती ।


आपने भी कुछ लिखा हो लाडली के लिये तो भेजें यहां

14 टिप्‍पणियां:

  1. वाह सदा जी बेटियों की याद दिला दी बहुत सुन्दर कविता है बच्चों के साथ खुद उन पलों को जीना कितना अच्छा लगता है बधाई

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत सुन्दर रचना। लाजवाब

    उत्तर देंहटाएं
  3. आपकी लाडली पर मैं बारी-बारी जाऊं ............प्यारी गुडियां आई लव यू ...................बेटा

    उत्तर देंहटाएं
  4. बाहों के झूले में चुप हो जाती

    सपनों की दुनिया में खो जाती


    कभी मुस्‍काती सोते-सोते जब,

    मां तो बस तुझमें खो जाती ।
    लाजवाब रचना
    बचपन तो बचपन होता हॆ,बचपन का क्या कहना
    बचपन में खोकर तो देखो,हर पल मधुर सलोना

    उत्तर देंहटाएं
  5. तस्वीर औत काव्य दोनों ही शानदार हैं...लेखनी बेटियों को समर्पित करने के लिए बहुत बहु धन्यवाद।

    उत्तर देंहटाएं
  6. सुन्दर रचना.....

    ...तस्वीर भी बहुत प्यारी है.

    उत्तर देंहटाएं
  7. बेटी की मां होकर इस सुख को जाना..आपकी कविता ने भी माना..!!
    बहुत बधाई और शुभकामनायें ..!!

    उत्तर देंहटाएं
  8. kyaa baat hai....aapne to yahaan gazab hi kiyaa hua hai.....mere jaisaa bhoot bhi yahaan par bheengaa hua hai......!!

    उत्तर देंहटाएं
  9. बेहतरीन!

    ----
    कल 29/11/2011को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

    उत्तर देंहटाएं
  10. क्या बात है , आप को बहुत बहुत बधाई और यशवंत भाई को भी बहुत बहुत आभार ऐसे ऐसे पुराने रत्नों को खोज खोज़ कर सामने लाने के लिए

    उत्तर देंहटाएं
  11. बालपन की कोमलता ओर ममतामयी माँ का सानिध्य ओर उसकी ममतामयी छावं में सहेजता बचपन ..बहुत ही भाव पूर्ण...सुन्दर अभिव्यक्ति ..शुभ कामनायें !!!

    उत्तर देंहटाएं
  12. बहुत सुंदर भावों से बेहतरीन रचना....

    उत्तर देंहटाएं