सोमवार, 8 फ़रवरी 2010

रोना पड़ता है ...













लगता है कोई जादू है

मां की गोद में

जो मेरा रोना

बंद हो जाता है

मां बेचैन होकर कहती

क्‍या हुआ

मेरी मुनिया को

सारा घर सर पे उठा रखा था

पर क्‍या करूं मैं

मां की गोदी में आकर

सब कुछ

अच्‍छा लगता है

इसलिए

कभी-कभी

इतना रोना पड़ता है ....।


11 टिप्‍पणियां:

  1. "मां की गोदी में आकर
    सब कुछ
    अच्‍छा लगता है
    इसलिए
    कभी-कभी
    इतना रोना पड़ता है ....।"
    अद्भुत सोच - बहुत बहुत सुद्नर. तस्वीर तो सोने पै सुहागा है.

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  2. चित्र और कविता दोनों ममस्पर्शी

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  3. मां की गोदी में आकर
    सब कुछ
    अच्‍छा लगता है
    जी हाँ माँ की गोदी होती ही है इतनी सुहानी

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  4. चित्र इतना वास्‍तिक है कि लगता है अभी गोद में उठा लें । और नीचे लिखी पंक्तियां दृश्‍य को पूरा कर रही हैं ... गोद में जाने के लिए रोना पडता है :)

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  5. अले! गुड़िया लानी... तुम अभी छोटी हो न इसलिए लोती हो.....मै तो अब बिलकुल नहीं रोती क्योंकि बड़ी हो गई हूँ ना.... पर अब भी छोटे बच्चे जैसे मम्मी की गोद में लेट जाती हूँ तो सब हंसते हैं...वैसे तुम सच कहती हो मम्मी की गोद से प्यारी जगह और कोई नहीं....

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  6. मुझे भी रोना आ गया..... मैं तो अब अपनी माँ को बहुत मिस करता हूँ.... कई लोग मुझे कहते हैं कि मैं अपनी मम्मी को लेकर बहुत नोस्टालजिक हूँ... उनके जाने के बाईस साल बाद भी बच्चों की तरह रोता हूँ....

    मुझे यह रचना बहुत अच्छी लगी.... मन को छू गई.....

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  7. Sach ek baar fir Maa ki god me rona chahti hooon main

    Dil ko chhu gayi aapki ye rachna

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  8. मुझे यह रचना बहुत अच्छी लगी.... मन को छू गई.....

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