सोमवार, 16 अगस्त 2010

शीशे में यदि ....


नन्‍ही परी मेरी

घुटनों के बल चलती है,

खड़े होने की कोशिश में

कभी वह सहारा लेती है

मजबूत चीजों का,

कभी उसके हांथ में टेबिल

आ जाती है

तो कभी पलंग का कोना,

कभी वह ड्रेसिंग टेबिल पकड़ती,

और फिर उस पर रखती अपने खिलौने,

तब उसकी खुशी का ठिकाना नहीं होता,

शीशे में यदि दिख जाता

उसे अपना चेहरा ....।

12 टिप्‍पणियां:

  1. कोमल अभिव्यक्ति-ममतामयी!

    उत्तर देंहटाएं
  2. मासूमियत से भरी सुन्दर रचना
    कोमल बाहों को सहारा चाहिये ...

    उत्तर देंहटाएं
  3. ये नन्ही परियां ऐसे ही चहकती रहें ...खुश होती रहें ...
    सुन्दर अभिव्यक्ति ...!

    उत्तर देंहटाएं
  4. प्यारी और मासूम अभिव्यक्ति...
    ____________________

    आप सबका 'बाल-दुनिया' में स्वागत है.

    उत्तर देंहटाएं
  5. कित्ती प्यारी बातें...प्यारा चित्र..बधाई.
    _________________
    पाखी की दुनिया में मायाबंदर की सैर...

    उत्तर देंहटाएं
  6. मनभावन होने के कारण
    "सरस पायस" पर हुई "सरस चर्चा" में
    प्यारी-प्यारी इस चर्चा में प्यार बहुत है
    !

    शीर्षक के अंतर्गत
    इस पोस्ट की चर्चा की गई है!

    उत्तर देंहटाएं