शुक्रवार, 16 दिसंबर 2011

मां कह दो ...


















शब्‍दों को अर्थ देने का मन करे
तो मां कह दो
जब कुछ करने में असमर्थ हो
तो मां कह दो
चोटिल हो मन से तन से
तो मां कह दो
सुकून की तलाश हो जब
तो मां कह दो
तुम्‍हें कुछ भी असंभव लगे जब
तो मां कह दो
सज़दे में हो जब भी
तो मां कह दो
रक्षा के मंत्र जब अभिमंत्रित करने हो
तो मां कह दो
सुन लेती है मन की आवाज दूर से भी
जो मां कह दो ...
रूठकर भी हंस देती है जो प्‍यार से तुम
मां कह दो ... 

'' सच मां शब्‍द कितना जादू करता है न ''

12 टिप्‍पणियां:

  1. माँ शब्द का जादू सिर्फ महसूस किया जा सकता है।

    सादर

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  2. बहुत सुन्दर अर्थपूर्ण किन्तु सबसे सरल भी ..
    अभिनन्दन.. सदा ..

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  3. सभी कहते हैं भगवान् सभी जगह नहीं पहुचं सकते , इस लिए माँ बनाए.... !अति सुन्दर रचना.... :)

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  4. ममता से भरी सुन्दर पंक्तियाँ !
    आभार !

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  5. ममता से ओत-प्रोत भावमयी सुन्दर रचना...

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  6. माँ तो माँ होती है .........अति सुंदर भाव ..

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  7. रूठकर भी हंस देती है जो प्‍यार से तुम
    मां कह दो ...

    Sach me.... Buhut Sunder

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  8. माँ तो झट से मान जाती है ...थोडा प्यार करते ही.... आपकी कविता बहुत प्यारी है....

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  9. माँ मे शक्ति है, स्नेह है, मिठास है,
    माँ मे प्राथना है, ईश्वर का वास है।

    ममत्व से भरी इस सुंदर रचना के लिए बहुत -बहुत धन्यवाद है।

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  10. माँ शब्द में ही इतना जादू है तो माँ में कितना होगा .... अनुमान भी नहीं लगा सकते । ...सुंदर रचना

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