बुधवार, 13 मार्च 2013

माँ के साये में .... (1)














मुझे एक बच्‍ची की डायरी मिली,जिसे पढ़ते हुये मैने पाया जिसका शब्‍द-शब्‍द अभिषेक करता रहा माँ की ममता का, कभी वो एक सपना देखती नवजात शिशु का जो सफेद कपड़े में लिपटा माँ के बगल में लेटा है और बंद नन्‍हीं मुट्ठियों के बीच उसने माँ का आँचल पकड़ रखा है इस भय से कि माँ उसे छोड़कर चल न दे, जिस दिन उसे ये सपना आया वो खुशी से रो पड़ी, माँ कितना प्‍यार करती है उससे, उसे यूँ माँ की ममता मिली और इसतरह वो उस रात की कर्जदार हो गई, उसने इस सपने को जिस दिन देखा तो उसने उगते सूरज से कहा ... सूरज दादा आज तुम जल्‍दी क्‍यूँ आ गये माँ चली गई न, उसकी मासूमियत पे किरणें मुस्‍कराते हुये कहने लगीं चलो हम तुम्‍हारी माँ का ख्‍याल बन जाते हैं और हर पल तुम्‍हारे साथ रहेंगे, माँ के साये की तरह ...
इस सफ़र के अगले पन्‍ने पर हम जल्‍दी ही चलेंगे
तब तक बच्‍ची को माँ के साये में रहने देते हैं

13 टिप्‍पणियां:

  1. कोई माँ का ख़याल बन कर जीवन की तपती धूप में साया बन कर खडा तो हो ! कोई माँ के आँचल की छाँव बन कर ममता से दुलार तो ले ! बहुत मर्मस्पर्शी पोस्ट !

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  2. :) सु कुमोल भाव लिए अत्यंत सुंदर भावपूर्ण ह्रदयस्पर्शी रचना...

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  3. बहुत भावपूर्ण प्रस्तुति....

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  4. इस सफ़र के अगले पन्‍ने पर हम जल्‍दी ही चलेंगे ........
    बेसब्री से इंतजार रहेगा ....
    शुभकामनायें !!

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  5. माँ से नज़दीकियाँ
    बेहद भावपूर्ण प्रस्तुति

    सादर

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  6. माँ का आँचल तो हमेशा ही साथ रहता है ..... बस एहसास करने की ज़रूरत है ...

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  7. मन को छूते एहसास. अनुपम कृति, बधाई.

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