शुक्रवार, 16 सितंबर 2011

उसका बचपन ....











आंचल
में मेरे
छिपाता चेहरा उसका बचपन
मैं झांकती उसकी आंखों में
हंसी खिलखिलाती
चमकती उसकी आंखें
भूल जाती मैं
सारी थकान सारी मायूसी
एक हंसी मेरे होठों पर
आ के थिरकती
मां की कही बात पे
यकीन हो उठता मेरा
कहती थी वो
हर मां में यशोदा मां की
ममता छिपी होती है
हर बच्‍चे में
कान्‍हा का हठ होता है
हर थपकी मां की हथेली का
दुलार नहीं होती
निस्‍वार्थ होती मां की ममता
हर बच्‍चे के लिए
किसी एक पे इसका
अधिकार नहीं होता ... !!!

बुधवार, 7 सितंबर 2011

कोई कैसे जिए ....














मां
तुम इक दुआ हो मेरे लिए
तुझ बिना बता कोई कैसे जिए

हसरत तेरी मेरी खुशी हरदम,
फिर कोई दर्द मुझको कैसे छुए

गुरुवार, 14 जुलाई 2011

गीत गाए किसी ने ...












थाप ढोलक पर पड़ी
फिर
मंगल गीत गाए किसी ने
रिमझिम फुहारों ने
दामन भिगाया है उसका
आशीषों से ..
शहनाई की धुन
करने लगी जब विदा बेटी को आंगन से
मेघो ने गर्जना की
दिल ने चुपके से आवाज की
रूदन मां का बिलखना बेटी का ..
हो कैसे कलेजा पत्‍थर
फिर बाबुल का ...

बुधवार, 6 जुलाई 2011

जाने क्‍यों ....?







जाने क्‍यों ....?

वह, आज स्‍कूल नहीं,

जाना चाहती,

पूछने पर बस,

उसका वही ठुनकना

हम स्‍कूल नहीं जाएंगे,

जाने क्‍यों ....?

क्‍या बात है

मुझे अभी सोना है

रोज-रोज जल्‍दी

जगा देती हो

उठो ब्रश कर लो

तैयार हो जाओ

जल्‍दी दूध पी लो

रिक्‍शे वाला

आता होगा

मम्‍मा तुम रोज

एक ही बात बोलती हो

जाने क्‍यों ....?

सब कुछ

एक ही सांस में

बोल गई गुड्डो

मैं हैरान सी

उसकी बड़ी-बड़ी

उनींदी आंखों में

शबनम की बूंदों से

आंसुओ को देख

विचलित हो गई

कहीं मैंने

इसका बचपन

इसके सपने

छीन तो नहीं लिए ....।।


शनिवार, 18 जून 2011

पापा की बातें ...








पापा की बातें,

करते हैं हम उंगली पकड़ के बच्‍चों की,

आज भी जब चलते हैं हम,

यादों की गलियों में

बारिश में भीगते हम जब

वो बालों का सुखाना पापा का

मां डांटती जब

पीठ के पीछे छिपाना पापा का

नहीं भूले हम ऐसा कोई लम्‍हा अभी तक

गर्मियों की रातों में

तारों की छांव में कहानियां सुनाना पापा का....