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मंगलवार, 15 फ़रवरी 2011

मां तुम ....








मेरी आंखे नींद से

बोझिल होती हैं पर

उनमें नींद नहीं आती

बिन तुम्‍हारे

कोई गीत गुनगुनाए ।

सुबह को बिन तुम्‍हारे

जगाये जागने का

मन नहीं करता

जब तुम

प्‍यार से कहती हो

ऊं साईं राम

बेटा उठ जाओ

मेरी बंद पलकों

में तुम्‍हारी छवि

समा जाती

मां तुम

खामोश मत रहा करो

तुम्‍हारा मौन

मुझे विचलित कर देता है ।