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मंगलवार, 8 मार्च 2011

कोख में पली हूं नौ माह मैं भी तो मां ...












रस्‍म के नाम पर, रिवाज के नाम पर जाने,

कब तक होती रहेगी यूं ही कुर्बान जिंदगी ।

पोछकर अश्‍क अपनी आंख से पूछती जब,

बेटी मां से क्‍यों दी मुझे तूने ऐसी जिंदगी ।

मेरा कोई दोष जो मुझे मिला ये कन्‍या जन्‍म,

क्‍या दर्द, और वेदना बनके रहेगी ये जिंदगी ।

तेरी कोख में पली हूं नौ माह मैं भी तो मां,

आ के धरा में करती हूं मैं तेरी भी बंदगी ।

माना की पराई हूं सदा से लोग कहते आये,

पीर मेरी समझ ली बिन कहे तुमने दी जिंदगी ।

तिरस्‍कृत हुई सहा अपमान भी मैने, नहीं छोड़ा,

फिर भी मैने ईश्‍वर इसे जो मिली मुझे जिंदगी ।

दूंगी संदेश जन-जन को मैं, करूंगी सार्थक जीवन को,

अभिशाप नहीं वरदान अब बेटी बचाओ इसकी जिंदगी ।